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नवरात्रि

नवरात्रि यह उत्सव है        शक्ति की आराधना का                 शक्ति की उपासना का                        9 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में मां शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है ।नवरात्रि शब्द एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'।  इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति की देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है।  शक्ति की देवी मां दुर्गा के अस्त्र हैं:- शंख,चक्र,गदा, कमल,त्रिशूल, तलवार, धनुष बाण, अभय मुद्रा। वसंत की शुरुआत और शरद ऋतु की शुरुआत,जलवायु और सूरज के प्रभावों का महत्वपूर्ण संगम माना जाता है। इन दो समय मां दुर्गा की पूजा के लिए पवित्र अवसर माने जाते है।यह पूजा वैदिक युग से पहले, प्रागैतिहासिक काल से चला आ रहा है।  नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। पौष, चैत्र, आषाढ, एवं अश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। परंतु चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्र...

गांधी "एक आदर्श विचारधारा"

आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जन्मतिथि है। आज जब करोना वायरस दुनिया भर में फैल चुका है, और वैज्ञानिक से बचने के लिए वैक्सीन की खोज में लगे हुए हैं। ऐसे वक्त में हमें गांधीजी की कुछ बातों को याद करने की जरूरत है। उन्होंने कहा था- हम ठोकर खा सकते हैं गिर सकते हैं लेकिन फिर उठेंगे। 1918 से लेकर 1920 तक भयंकर स्पेनिश फ्लू का दौर था उन्होंने इसके दौर को झेला है उनकी उस वक्त के कुछ बातें इस तरह से कही थी, जो हमें करोना वायरस से लड़ने के लिए भी प्रेरित करती हैं। गांधीजी कि 7 बातें जानिए कि जब तक वैक्सीन नहीं आ जाता अपने आप को कैसे सुरक्षित रखना है। 1-आप चाहते हैं कि लोग मास्क पहने दूरी बनाए और सफाई रखें लेकिन इसकी शुरुआत आपको स्वयं खुद से करनी होगी। 2- आपको इंसानियत से भरोसा नहीं खोना है इंसानियत एक समुद्र की तरह होती है अगर समुद्र की कुछ बूंदें गंदी हो गई तो इसका मतलब यह नहीं कि समुद्र गंदा हो जाएगा। इसका मतलब यह है कि अगर सब कुछ बुरा ही हो रहा है तो परेशान ना हो सकारात्मक रहे।क्योंकि दुनिया बहुत बड़ी है। अगर कहीं कुछ उथल-पुथल हो भी गई तो ऐसा नहीं कि सब कुछ खत्म हो गया। 3 - स्वास्थ्य ही...

गुस्सा "स्वयं से संघर्ष "

  बंद दुकान में कहीं से घूमता फिरता एक सांप घुस गया।दुकान में रखी एक आरी से टकराकर सांप मामूली सा जख्मी हो गया। घबराहट में सांप ने पलट कर आरी पर पूरी ताक़त से डंक मार दिया जिस कारण उसके मुंह से खून बहना शुरू हो गया। अब की बार सांप ने अपने व्यवहार के अनुसार आरी से लिपट कर उसे जकड़ कर और दम घोंट कर मारने की पूरी कोशिश कर डाली। अब सांप अपने गुस्से की वजह से बुरी तरह घायल हो गया। दूसरेदिन जब दुकानदार ने दुकान खोली तो सांप को आरी से लिपटा मरा हुआ पाया ।जो किसी और कारण से नहीं केवल अपनी तैश और गुस्से की भेंट चढ़ गया था।  कभी कभी गुस्से में हम दूसरों को हानि पहुंचाने की कोशिश करते हैं मगर समय बीतने के  बाद हमें पता चलता है कि हमने अपने आप का ज्यादा नुकसान किया है। सीख - -  अच्छी जिंदगी के लिए कभी कभी हमें, कुछ चीजों को, कुछ लोगों को, कुछ घटनाओं को,कुछ कामों को और कुछ बातों को नजर अन्दाज  करना चाहिए। अपने आपको मानसिक मजबूती के साथ नजरअन्दाज करने का आदी बनाइये।जरूरी नहीं कि हम हर एक्शन का एक रिएक्शन दिखाएं।हमारे कुछ रिएक्शन हमें केवल नुकसान ही नहीं पहुंचाएंगे बल्कि हो सक...

दायित्व

एक लड़का था. अपने गाँव का सबसे होनहार और शिक्षित. पिताजी गर्व से लोगो को बताते फिरते थे कि उनका बेटा देश की रक्षा कर रहा है. अपने गाँव का पहला वर्दीधारी था वो. माँ आधे दिन इंतजार और आधे दिन उसकी बड़ाई में गुजारती थी. उसका एक बचपन का प्यार भी था जिसे उसने पुरे समाज से लड़कर अपनाया था, अग्नि को साक्षी मानकर उसके साथ जीने मरने की कसमें खाया था. लेकिन दूसरी तरफ लड़का, वो तो मातृभूमि के लिए अपना दायित्व निभा रहा था. माँ कहती थी कि जब जब सूरज की किरणें घर की चौखट पर पड़ती है आँखे अपने बच्चें को देखने के लिए उम्मीद बाँधने लगती है. पत्नी जो कभी गुस्सा होती तो कभी प्यार जताती लेकिन मन में डर बनाये रखती थी. पिता जो बेटे के साहस और कर्तव्य पर गर्व से फुले नहीं समाते उनके माथे में भी अख़बारों के पन्नें से आई ख़बरें शिकन ले आती थी. ऐसे ही एक रोज वो अपने घर आया था. बड़ी दिनों के बाद छुट्टियां मिली थी उसे. माँ और पत्नी के लिए साड़ियां लाया था, पिता के पसंद का वही सफ़ेद कुर्ता पैजामा भी याद था उसे. पूरा गाँव उसके स्वागत के लिए खड़ा था, आखिर उस गाँव का असली हीरो जो आया था. एक कंधे में माँ और पत्नी के प्यार और दूस...

चाणक्य "एक अमर व्यक्तित्व"

कौटिल्य अथवा 'चाणक्य' अथवा 'विष्णुगुप्त' (जन्म- अनुमानत: ईसा पूर्व 370, पंजाब; मृत्यु- अनुमानत: ईसा पूर्व 283, पाटलिपुत्र) सम्पूर्ण विश्व में एक महान राजनीतिज्ञ और मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनका व्यक्तिवाचक नाम 'विष्णुगुप्त', स्थानीय नाम 'चाणक्य' (चाणक्यवासी) और गोत्र नाम 'कौटिल्य' (कुटिल से) था। ये चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमन्त्री थे। चाणक्य का नाम संभवत उनके गोत्र का नाम 'चणक', पिता के नाम 'चणक' अथवा स्थान का नाम 'चणक' का परिवर्तित रूप रहा होगा। चाणक्य नाम से प्रसिद्ध एक नीतिग्रन्थ 'चाणक्यनीति' भी प्रचलित है। तक्षशिला की प्रसिद्धि महान अर्थशास्त्री चाणक्य के कारण भी है, जो यहाँ प्राध्यापक थे और जिन्होंने चन्द्रगुप्त के साथ मिलकर मौर्य साम्राज्य की नींव डाली। 'मुद्राराक्षस' में कहा गया है कि राजा नन्द ने भरे दरबार में चाणक्य को उसके उस पद से हटा दिया, जो उसे दरबार में दिया गया था। इस पर चाणक्य ने शपथ ली कि वह उसके परिवार तथा वंश को निर्मूल करके नन्द से बदला लेगा।...

नारी सहमति

भले ही आज हिंदुस्तान मंगल तक पहुँच गया हो लेकिन आज भी हिंदुस्तान का पुरुष प्रधान देश संकीर्णताओं से ग्रस्त है। खासकर के महिलाओं के मामलें में। हर विकसित देश विकास को प्राप्त करने के लिए महिलाओं और पुरुषों को कंधे से कन्धा मिलाकर चलने की बात करता है। लेकिन ये सुझाव शायद ही भारत जैसे देश में अपनाए जा सके। यहाँ तो प्राचीन काल से ही स्त्रियों को पुरुषों से कमतर ही समझा गया है जो आज भी विद्यमान है। हमारे देश के संविधान को बने हुए ६७ साल हो चुके है जो सभी देशवासियों को हर प्रकार की स्वतंत्रता देने का वचन तो देता है लेकिन स्त्रियों के मामले में ये संविधान केवल एक पुस्तक मात्र बन कर रह गया है। यूँ तो इसमें स्त्रियों को हर प्रकार की स्वतंत्रता पुरुषों के बराबर दी गयी है परन्तु वास्तविकता क्या है इससे सभी अवगत है। यहाँ स्त्रियाँ सिर्फ वैवाहिक जीवन का सुख भोगने का एक साधन मात्र बन कर रह गयी है। उनका बस एक ही कर्त्तव्य निर्धारित किया गया है - जीवन पर्यन्त पति और उसके परिवारजनों की सेवा सुशुश्रा करना। जन्म से ही उन्हें स्वयं निर्णय लेने के योग्य समझा ही नहीं जाता। उनका हर निर्णय उनके माता-पिता व भा...

Humanity Biggest Religion

Humanity is the word we hear very often, but little did we know that the word humanity is derived from a Latin word humanitas for “human nature, kindness.” In today’s world of concrete jungle, virtual world where we all are connected by social media nothing seems to touch us, we always feel there is no humanity left. Probably we all are too busy to see through people’s pains and needs. It may be true in few cases, in every day walk of life where we have stopped showing emotions and feelings for small things as we do not have time to pause and look around. Humanity is as small thing as a smile of gratitude; it need not be every time something very big or involve monetary rewards. We may not be giving heed to small things in everyday life but at the same time when human race is hit by some adversity our heart gives out a cry and reaches out for people who are in need. We all try to extend our hand of kindness in different ways by charity, donations sometimes even handing out food package...