कितना कठिन समय है वो परीक्षा के 2 घंटे । किसी को बहुत ज्यादा लगते हैं और किसी को बहुत कम।बहुत बार परीक्षा में ड्यूटी दी है मैंने और देखा उन 2 घंटो में विद्यार्थी क्या–क्या हरकतें करते है।जिनको पेपर आता है वो तो बेचारे गर्दन भी नहीं उठा पाते,लगातार लिखते ही रहतें है।बार–बार अतिरिक्त उत्तर पुस्तिका लेते हैं।मगर कुछ ऐसे होते है, जो उनको देख देख कर ये जानने के लिए तड़प रहे होते है की इन्होंने क्या–क्या लिख दिया। मुझे तो उन बेचारों पर बहुत तरस आता है जो पूरा साल कक्षा में मस्ती मारते हैं और परीक्षा वाले कमरे में बड़ी बेचारी सी शक्ल बनाते है।इधर उधर झांकने की कोशिश करते हैं।उनको ऐसा करने के लिए मना कर दो तो हमे दुश्मन की भांति देख रहे होते है।2 घंटे से पहले उत्तर पुस्तिका वापिस नहीं लेने के फरमान होते है तो उनको 2 घंटे परीक्षा कक्ष में बैठाना पड़ता है और उनकी हरकतों पर ध्यान रखना पड़ता है। नकल करने के सभी प्रयास जब विफल हो जातें है तो वो परीक्षा कक्ष का बहुत ही बारीकी से अध्ययन करना शुरू कर देते है।पहले शुरुआत पंखे से करते है।देखते है कि कमरे में कितने ...