बीजेपी-जेडी(यू) गठजोड़ बिहार में सरकार बनाने को तैयार है, उधर नरेंद्र मोदी और अमित शाह के सामने एक विकट स्थिति खड़ी हो गई है- नीतीश कुमार का क्या करें? बिहार जनादेश- भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 74 सीटें जीती हैं, जो 2015 में सिर्फ 53 थीं, जबकि जनता दल (युनाइटेड) की सीटें 71 से घटकर 43 हो गई हैं- पदस्थ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहीं ज़्यादा, नरेंद्र मोदी के लिए है. कुछ भी हो, नीतीश की छवि और लोकप्रियता दोनों को धक्का लगा है, एक ऐसा फेक्टर जिसने संभवत: बीजेपी को पीछे खींचा है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) 125 सीटें लेकर, बहुमत के 122 के आंकड़े से आगे निकल चुका है, जबकि आरजेडी-कांग्रेस-वाम महागठबंधन 110 पर रुका दिख रहा है. बिहार में, बीजेपी अब सीनियर सहयोगी के तौर पर उभरकर सामने आई है, और उसकी पीठ पर अब नीतीश कुमार के रूप में, एक थका हुआ नेता सवार है. अब ये कुछ ही समय की बात है, जब पार्टी अपना हक़ जमाएगी और सूबे की कमान अपने हाथ में ले लेगी. नीतीश-हटाओ अभियान के भारी प्रचार के बीच, नीतीश कुमार को गद्दी पर बिठाना, लोगों के गले नहीं उतरेगा. लेकिन इससे जल्दी ही ऐसी स्थिति ज़रूर पैद...